उत्तराखंड में मानसून की शुरुआत के साथ ही पहाड़ी इलाकों में हाहाकार मच गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच स्थित सिरोबगड़ स्लाइड जोन की है, जहां पहाड़ी से भारी मात्रा में विशाल बोल्डर और मलबा गिरने से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह ठप हो गया है। इस हाईवे के बंद होने से दोनों छोर पर सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम की यात्रा पर निकले हजारों तीर्थयात्री और स्थानीय लोग घंटों से बीच रास्ते में फंसे हैं और सड़क खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
चारधाम यात्रा की रफ्तार थमी, जरूरी चीजों की सप्लाई पर पड़ा असर
सिरोबगड़ में हुए इस भयंकर भूस्खलन ने केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। रुद्रप्रयाग और चमोली जिले की लाइफलाइन माने जाने वाले इस मुख्य हाईवे पर यातायात ठप होने से पहाड़ी इलाकों में जरूरी सामानों की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें मार्ग को साफ करने की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन पहाड़ी से लगातार गिरते पत्थरों के कारण राहत एजेंसियों का काम बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो गया है।
आपको बता दें कि पिछले करीब तीन दशकों से सिरोबगड़ स्लाइड जोन बदरीनाथ हाईवे के लिए सबसे बड़ा नासूर बना हुआ है। साल 2026 के इस मानसून सीजन में भी करोड़ों रुपये की तकनीकी परियोजनाएं और बड़ी-बड़ी योजनाएं धरी की धरी रह गई हैं। सरकार और विशेषज्ञों की तमाम कोशिशों के बावजूद इस खतरनाक भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का आज तक कोई स्थायी तकनीकी समाधान नहीं निकाला जा सका है, जिसका खामियाजा हर साल यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
अलकनंदा की लहरों में समाई शिव प्रतिमा, निचले इलाकों में बढ़ा बाढ़ का खतरा
दूसरी तरफ, उत्तराखंड की उफनती नदियां डराने लगी हैं। रुद्रप्रयाग के बेलनी पुल के नीचे स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा अलकनंदा नदी के तेज बहाव में छाती तक समा गई है। प्रतिमा के चारों ओर बेहद तेज वेग से पानी टकरा रहा है, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण अलकनंदा नदी अपने सामान्य जलस्तर को पार कर काफी ऊपर बह रही है। नदी का रौद्र रूप देखकर किनारे वाले इलाकों में भूकटाव का खतरा बढ़ गया है, जिससे निचले घाटों और तटों के पास रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
संवेदनशील इलाकों में भारी फोर्स तैनात, प्रशासन ने जारी की सख्त चेतावनी
हालात बिगड़ते देख जिला प्रशासन ने आनन-फानन में आपदा प्रबंधन, स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों को सभी संवेदनशील और भूस्खलन संभावित इलाकों में तैनात कर दिया है। किसी भी अप्रिय घटना या आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए भारी मशीनरी और जीवन रक्षक संसाधनों को तत्काल स्टैंडबाय पर रखा गया है।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक जिले में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है। स्थानीय नागरिकों और चारधाम पर आने वाले यात्रियों को नदी, नालों और बरसाती गधेरों (पहाड़ी झरनों) के बिल्कुल पास न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि तेज बहाव के दौरान नदी किनारे जाकर वीडियो बनाना, रील तैयार करना या सेल्फी लेने की कोशिश करना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए ऐसी लापरवाही से बचें। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आपदा या रास्ते बंद होने से जुड़ी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल सरकार द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
यात्रा शुरू करने से पहले जरूर लें मार्ग की ताजा जानकारी
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि संबंधित निर्माण एजेंसियां हाईवे को दोबारा खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। हालांकि, पहाड़ी से रुक-रुककर लगातार गिर रहा मलबा काम में बार-बार बाधा डाल रहा है, जिसके चलते सुरक्षा के लिहाज से राहत कार्य को बीच-बीच में रोकना पड़ रहा है। प्रशासन ने केदारनाथ और बदरीनाथ जाने वाले सभी यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी आगे की यात्रा शुरू करने से पहले कंट्रोल रूम या आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से मार्ग की ताजा स्थिति का अपडेट जरूर ले लें और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
