देहरादून। 25 जून 1975 की वो काली रात देश के इतिहास का एक ऐसा पन्ना है, जिसे चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। इसी दौर की यादों और लोकतंत्र की रक्षा करने वाले नायकों को सम्मान देने के लिए देहरादून के जी.एम.एस. रोड स्थित एक होटल में ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस भावुक और गरिमामयी समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपातकाल के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री धामी ने मंच से दोटूक शब्दों में कहा कि तत्कालीन सरकार ने सिर्फ और सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए देश की आत्मा पर चोट की थी। आम नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई, अखबारों और प्रेस की आजादी पर ताला लगा दिया गया और हमारे पवित्र संविधान की मूल भावना को गहरी चोट पहुंचाई गई। दरअसल, सीएम धामी का इशारा उस दौर की तानाशाही की तरफ था, जिसने पूरे देश को एक जेलखाने में तब्दील कर दिया था।
‘संविधान हत्या दिवस’ और लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद बुजुर्ग सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि आज हम जिस आजाद हवा में सांस ले रहे हैं, वह इन लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, साहस और लंबे संघर्ष की बदौलत ही मुमकिन हो सका है। अगर इन लोगों ने उस दौर में लाठियां और जेल की यातनाएं न सही होतीं, तो देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था दोबारा बहाल होना मुश्किल था। बताया जा रहा है कि सरकार अब इन सेनानियों के संघर्षों को स्कूली पाठ्यक्रमों और डिजिटल माध्यमों से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना पर भी विचार कर रही है ताकि युवाओं में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना जागृत हो सके।
पेंशन में बढ़ोतरी और सरकारी सहूलियतें
असल में, उत्तराखंड की धामी सरकार लोकतंत्र सेनानियों के मान-सम्मान और उनके कल्याण को लेकर काफी गंभीर रही है। इस बात का जिक्र खुद मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में किया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2023 में उनकी सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 20 हजार रुपये प्रति महीना कर दिया था। इसके अलावा, आपातकाल के दौरान जेल की सलाखों के पीछे दिन काटने वाले सेनानियों और उनके आश्रित जीवनसाथियों के लिए विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी सरकारी दफ्तर या सुविधा का लाभ उठाने में कोई परेशानी न हो।
अंत्योदय और सुशासन का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार ‘सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण’ को केंद्र में रखकर काम कर रही है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का जो मूलमंत्र हमें मिला है, उसी के आधार पर समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति यानी अंत्योदय तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे विकसित भारत और एक श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
इस खास सम्मान समारोह में सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड सियासत के कई बड़े चेहरे भी मौजूद थे। मंच पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ के साथ-साथ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार और महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल भी सेनानियों का हौसला बढ़ाते नजर आए। सभी ने एक सुर में लोकतंत्र के इन प्रहरियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
