उत्तराखंड में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। सूबे की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। देहरादून स्थित प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को हुई भाजपा कोर कमेटी की एक बेहद अहम बैठक में चुनावी शंखनाद कर दिया गया। इस मैराथन बैठक में पार्टी ने साफ कर दिया है कि इस बार सारा जोर उन कमजोर बूथों पर रहेगा, जहां पिछले दो चुनावों में भाजपा को शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
दरअसल, यह बैठक कई मायनों में खास रही। उत्तराखंड भाजपा के नए नवेले प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन ने कार्यभार संभालने के बाद पहली बार देहरादून पहुंचकर इस बैठक की कमान संभाली। तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों, मंत्रियों और संगठन के बड़े चेहरों ने शिरकत की। बैठक में आगामी Assembly Election 2027 का पूरा रोडमैप मेज पर रख दिया गया और सभी दिग्गजों को उनकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
मंत्रियों को मिला ‘डबल टास्क’, कसनी होगी कमर
बैठक के भीतर से जो छनकर खबरें आ रही हैं, उसके मुताबिक धामी कैबिनेट के मंत्रियों पर इस बार दोहरी जिम्मेदारी रहने वाली है। पार्टी आलाकमान ने साफ कर दिया है कि मंत्रियों को केवल अपनी विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहना है। उन्हें उन जिलों में भी कमल खिलाने का टास्क दिया गया है, जहां के वे प्रभारी मंत्री हैं। नेताओं को दोटूक शब्दों में कहा गया है कि चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, इसलिए दफ्तरों से निकलकर सीधे जनता के बीच जाएं। जनता के विकास कार्यों में किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
3 महीने का महा-अभियान और कमजोर बूथों पर नजर
विपक्ष को चारों खाने चित करने के लिए उत्तराखंड भाजपा ने एक सीक्रेट ‘बूथ प्लान’ तैयार किया है। इसके तहत जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में राज्यभर में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। असल में, पार्टी का पूरा ध्यान उन बूथों को मजबूत करने पर है जो पिछले चुनाव में भाजपा के हाथ से फिसल गए थे। इसके लिए माइक्रो लेवल प्लानिंग की गई है। कोर कमेटी के दिग्गजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद हर बूथ पर कम से कम दो दिन का समय बिताएं, यानी वहां प्रवास करें। इस दौरान स्थानीय लोगों से जो भी फीडबैक मिलेगा, उसे सीधे सरकार तक पहुंचाया जाएगा ताकि नाराज वोटरों को समय रहते मनाया जा सके।
अनुशासन ही जीत की कुंजी, गुटबाजी पर लगेगी लगाम
चुनावी समर में उतरने से पहले संगठन ने अपने नेताओं को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। बैठक में मौजूद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने साफ कहा कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल ही सत्ता में वापसी का रास्ता तय करेगा। नेताओं को नसीहत दी गई है कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर सिर्फ और सिर्फ Assembly Election 2027 के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। भाजपा नेतृत्व को भरोसा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में किए गए ऐतिहासिक फैसले और केंद्र की मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सूबे में एक बार फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मददगार साबित होंगी।
