उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों कानून व्यवस्था और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उबाल देखा जा रहा है। इसी कड़ी में आज प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने राजभवन कूच किया और प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए राज्य की ‘ध्वस्त’ हो चुकी कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने और नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांगों पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए सरकार को निर्देशित करने की मांग की।
दरअसल, कांग्रेस पिछले कुछ समय से प्रदेश में बढ़ते अपराधों और सरकारी भर्तियों में हो रही देरी को लेकर मुखर रही है। राजभवन पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पार्टी के कई कद्दावर चेहरे शामिल थे। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार जनहित के मुद्दों पर मौन साधे हुए है, जिसके कारण प्रदेश की जनता और युवाओं में भारी रोष है।
कानून व्यवस्था के मोर्चे पर घेरी सरकार
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य की कानून व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और पुलिस प्रशासन स्थिति को संभालने में नाकाम साबित हो रहा है।
असल में, कांग्रेस ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे संवैधानिक प्रमुख होने के नाते इस मामले में हस्तक्षेप करें और राज्य सरकार को कड़े निर्देश दें ताकि प्रदेश की जनता को भयमुक्त वातावरण मिल सके। पार्टी का मानना है कि जब तक शीर्ष स्तर से सख्ती नहीं होगी, तब तक प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार आना मुश्किल है।
नर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ी मांग
इस मुलाकात का एक और मुख्य एजेंडा नर्सिंग अभ्यर्थियों का भविष्य था। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे नर्सिंग बेरोजगारों की आवाज को कांग्रेस ने राजभवन तक पहुंचाया है। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को अवगत कराया कि नर्सिंग अभ्यर्थियों के मामले में स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) की ओर से एक प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है।
बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के बावजूद राज्य सरकार निर्णय लेने में देरी कर रही है, जिससे सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कांग्रेस ने मांग की है कि स्वास्थ्य महानिदेशक के प्रस्ताव के अनुरूप जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए ताकि प्रदेश के नर्सिंग प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस दौरान युवाओं के हक में अपनी बात रखी और कहा कि युवाओं के साथ हो रहा अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एकजुट दिखी कांग्रेस, सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
राजभवन पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में केवल अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि पार्टी के कई विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में विधायक लखपत सिंह बुटोला, मीडिया चेयरमैन राजीव महर्षि, महामंत्री राजेंद्र शाह और महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी जैसे नेता मौजूद रहे। इनके अलावा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, अमरेंद्र सिंह बिष्ट, अश्विनी बहुगुणा, वीरेंद्र पोखरियाल, ओमप्रकाश सती, अमरजीत सिंह और अखिलेश उनियाल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए राज्य सरकार को घेरने की बड़ी रणनीति पर काम कर रही है। एक तरफ जहां कानून व्यवस्था आम आदमी से जुड़ा मुद्दा है, वहीं नर्सिंग भर्ती सीधे तौर पर युवाओं और उनके परिवारों को प्रभावित करती है। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन विषयों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो पार्टी अपने आंदोलन को और तेज करेगी।
राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और ज्ञापन पर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि राजभवन के हस्तक्षेप के बाद प्रदेश सरकार इन संवेदनशील मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है।
