देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर सनातन संस्कृति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को लेकर बड़ी बात कही है। देहरादून के सेलाकुई में आयोजित मां भगवती जागरण में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2014 के बाद से देश में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में न केवल विकास हो रहा है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के ‘स्वर्णिम पुनर्जागरण’ का काल भी है। दरअसल, मुख्यमंत्री यहां आद्यशक्ति श्री माता वैष्णो देवी धाम सेवा समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां उन्होंने प्रदेश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल एक इमारत का खड़ा होना नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की आस्था और स्वाभिमान की जीत है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से केंद्र सरकार ने संकल्प शक्ति दिखाई, उसने सदियों के इंतजार को खत्म किया है। धामी के मुताबिक, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से लेकर केदारनाथ के पुनर्निर्माण तक, आज हर तरफ भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिल रही है।
चारधाम यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की लाइफलाइन मानी जाने वाली चारधाम यात्रा का जिक्र करते हुए एक महत्वपूर्ण आंकड़ा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि इस साल 22 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में अब तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि यह आंकड़ा श्रद्धालुओं की उत्तराखंड के प्रति अटूट आस्था का प्रमाण है। राज्य सरकार अब शीतकालीन यात्रा को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि साल भर तीर्थयात्रियों का आना-जाना बना रहे और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलें।
कनेक्टिविटी से बदल रही है उत्तराखंड की तस्वीर
धामी ने सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि अब दिल्ली से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे में पूरा हो रहा है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं खुद हाल ही में बहुत कम समय में दिल्ली से देहरादून पहुंचा हूं, जो पहले मुमकिन नहीं था।” इसके अलावा, सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के लिए बन रहे रोपवे और आदि कैलाश यात्रा के बढ़ते क्रेज ने सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में जान फूंक दी है।
सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि देवभूमि में जन्म लेना सौभाग्य की बात है, लेकिन जो लोग यहां आकर बस गए हैं, वे भी उतने ही भाग्यशाली हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत और देवत्व को सुरक्षित रखना सरकार के साथ-साथ आम जनता की भी जिम्मेदारी है। धामी ने अंत में कहा कि सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मंत्र पर काम कर रही है, जहां विकास और विरासत दोनों को बराबर अहमियत दी जा रही है।
