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पहाड़ के लाल हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती, सीएम धामी ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी भावुक विदाई

By: Sansar Live Team

On: Saturday, April 25, 2026 10:16 AM

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देहरादून में शनिवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती बड़े ही गौरव के साथ मनाई गई। इस खास मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी घंटाघर के पास स्थित एमडीडीए कॉम्प्लेक्स पहुंचे। वहां उन्होंने स्वर्गीय बहुगुणा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री के साथ राज्य के कई अन्य बड़े नेता भी इस गौरवशाली पल के साक्षी बने।

स्वतंत्रता संग्राम से जनसेवा तक का प्रेरणादायी सफर

मुख्यमंत्री धामी ने बहुगुणा जी के व्यक्तित्व और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद करते हुए कहा कि वे एक असाधारण नेता थे। उन्होंने न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि अपनी दूरदर्शी सोच से देश और समाज को एक नई दिशा भी दी। सीएम ने जोर देकर कहा कि बहुगुणा जी सिर्फ एक कुशल राजनेता नहीं थे, बल्कि जनसेवा के प्रति उनका समर्पण आज भी हम सबके लिए एक मिसाल है। उनके जीवन का हर अध्याय समाज के दबे-कुचले वर्गों को न्याय दिलाने के लिए समर्पित रहा।

पर्वतीय अंचलों के विकास के लिए निभाई निर्णायक भूमिका

बहुगुणा जी के योगदान को याद करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए जो कार्य किए, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। पहाड़ी इलाकों की समस्याओं को सुलझाने के लिए उन्होंने जो प्रभावी पहल की थी, उसी का नतीजा है कि आज इन क्षेत्रों में विकास की गति तेज हुई है। सीएम ने कहा कि बहुगुणा जी का पूरा जीवन सामाजिक समरसता और समावेशी विकास का प्रतीक था। उनके आदर्श आज भी हमें जनहित में निस्वार्थ भाव से कार्य करने का मार्गदर्शन देते हैं।

दिग्गज नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान सियासी गलियारे की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा के साथ-साथ विधायक खजान दास और दुर्गेश्वर लाल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी जनप्रतिनिधियों ने स्वर्गीय बहुगुणा के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि बहुगुणा जी का योगदान इतिहास के पन्नों में सदैव स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा और आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष से प्रेरणा लेती रहेंगी।

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