देहरादून: उत्तराखंड में अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधाम यात्रा 2026 का शंखनाद हो चुका है। लेकिन इस बार की यात्रा पिछले सालों के मुकाबले काफी अलग होने वाली है। तीर्थस्थलों की पवित्रता और सनातन परंपराओं को बनाए रखने के लिए मंदिर समितियों ने कुछ ऐसे कड़े फैसले लिए हैं, जिनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। सबसे बड़ा फैसला गंगोत्री मंदिर समिति की ओर से आया है, जिसने गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं।
गंगोत्री में ‘पंचगव्य’ के बिना एंट्री नहीं!
गंगोत्री मंदिर समिति ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत अब मंदिर परिसर में किसी भी गैर-हिंदू व्यक्ति को प्रवेश तभी मिलेगा, जब वह ‘पंचगव्य’ का सेवन करेगा। पंचगव्य यानी गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पवित्र मिश्रण। समिति का मानना है कि इस प्रक्रिया से न केवल आगंतुक का शुद्धिकरण होगा, बल्कि सनातन धर्म के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धा और निष्ठा की भी पुष्टि हो सकेगी।
क्यों पड़ी इस सख्त नियम की जरूरत?
यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि हिंदू धर्म के किसी भी बड़े अनुष्ठान में पंचगव्य का विशेष महत्व है। मंदिर समिति का तर्क है कि हाल के वर्षों में धामों में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जिनका सनातन परंपराओं से कोई सीधा लगाव नहीं है। ऐसे में यह कदम केवल उन्हीं लोगों को अनुमति देने के लिए उठाया गया है जो वास्तव में इस तीर्थ की मर्यादा का सम्मान करते हैं।
बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी बदले नियम
सिर्फ गंगोत्री ही नहीं, बल्कि श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने भी सुरक्षा और धार्मिक नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया है कि धाम में आने वाले गैर-हिंदू आगंतुकों को अब एक शपथ-पत्र (Affidavit) देना होगा। इस शपथ-पत्र के जरिए उन्हें अपनी आस्था और मंदिर की मर्यादा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करनी होगी। द्विवेदी के अनुसार, देवभूमि की प्राचीन गरिमा को बचाने के लिए ये नियम वक्त की जरूरत हैं।
यमुनोत्री ने चुनी अलग राह
एक तरफ जहां गंगोत्री और बद्री-केदार में नियम सख्त किए गए हैं, वहीं यमुनोत्री मंदिर समिति ने ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा को सर्वोपरि रखा है। यमुनोत्री समिति ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी भक्त के साथ जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे। उनका मानना है कि जो भी व्यक्ति धाम के दर्शन की इच्छा लेकर आता है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। इस तरह चारधाम यात्रा के शुरुआती पड़ाव पर ही अलग-अलग समितियों के अलग-अलग फैसलों ने इस बार की यात्रा को काफी चर्चा में ला दिया है।
