चारधाम यात्रा 2026 के शुरू होने से पहले ही उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने इस बार सुरक्षा और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए कड़े नियम लागू करने की तैयारी कर ली है। अब इन विश्व प्रसिद्ध मंदिरों में ‘गैर-सनातनियों’ के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। मंदिर समिति के इस फैसले ने न केवल श्रद्धालुओं, बल्कि बॉलीवुड गलियारों में भी खलबली मचा दी है।
सारा अली खान को भी दिखाना होगा ‘एफिडेविट’
बीकेटीसी (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ कर दिया है कि यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा। जब उनसे बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के बारे में पूछा गया, जो अक्सर केदारनाथ दर्शन के लिए आती हैं, तो द्विवेदी ने कहा कि अगर सारा अली खान जैसी कोई भी हस्ती मंदिर आती है, तो उन्हें अपनी आस्था का प्रमाण देना होगा। उन्हें एक ‘शपथ पत्र’ (Affidavit) भरना होगा जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी सनातन धर्म में गहरी आस्था है। यह शपथ पत्र मंदिर परिसर में ही उपलब्ध कराया जाएगा ताकि श्रद्धालु मौके पर ही इसे जमा कर सकें।
45 मंदिरों के लिए बोर्ड बैठक में लिया गया फैसला
मंदिर समिति की हालिया बोर्ड बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस फैसले के तहत न केवल बदरीनाथ और केदारनाथ, बल्कि समिति के अंतर्गत आने वाले अन्य 45 मंदिरों में भी गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। हेमंत द्विवेदी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी पृष्ठभूमि से आता है लेकिन वह सनातन धर्म को मानता है और इसके लिए शपथ पत्र देता है, तो उसे दर्शन करने से नहीं रोका जाएगा। यह कदम मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
सारा अली खान और केदारनाथ का खास रिश्ता
बता दें कि सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान भगवान भोलेनाथ की अनन्य भक्त मानी जाती हैं। फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान से ही उनका इस घाटी से गहरा लगाव रहा है। वह अक्सर पंच केदार और अन्य पवित्र धामों के दर्शन के लिए आती रहती हैं। सारा के अलावा भी फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां समय-समय पर यहाँ माथा टेकने पहुँचती हैं, लेकिन अब नए नियमों के तहत उन्हें भी इन प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
BKTC की इस नई व्यवस्था के बाद चारधाम यात्रा 2026 में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। समिति का मानना है कि इससे मंदिर की परंपराओं का संरक्षण होगा और केवल वही लोग प्रवेश करेंगे जो धर्म के प्रति समर्पित हैं।
