रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर व्यक्ति की ज़रूरत है। सरकार ने इसके लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जिनमें पीपीएफ (PPF), ईपीएफ (EPF) और एनपीएस (NPS) सबसे लोकप्रिय हैं। तीनों का मकसद एक ही है — भविष्य के लिए बचत — लेकिन इनके नियम, फायदे और शर्तें अलग-अलग हैं। आइए समझते हैं कि कौन सी स्कीम किसके लिए सही है।
पीपीएफ (PPF): सुरक्षित और टैक्स बचत वाली स्कीम
पब्लिक प्रोविडेंट फंड सरकार द्वारा चलाई जाने वाली लंबी अवधि की बचत योजना है। इसमें 15 साल तक निवेश किया जाता है, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की रकम दोनों टैक्स-फ्री होते हैं। कोई भी भारतीय नागरिक पोस्ट ऑफिस या बैंक में पीपीएफ खाता खोल सकता है। यह उन लोगों के लिए अच्छा है जो सुरक्षित निवेश चाहते हैं और टैक्स बचाना चाहते हैं।
ईपीएफ (EPF): नौकरीपेशा लोगों के लिए
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए है। इसमें कर्मचारी के वेतन से एक निश्चित हिस्सा कटता है और उतना ही योगदान नियोक्ता (कंपनी) भी देता है। यह रकम रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर मिलती है। इस पर भी टैक्स छूट का लाभ मिलता है। यह स्कीम अपने आप चलती रहती है, इसलिए नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सबसे आसान रिटायरमेंट बचत है।
एनपीएस (NPS): पेंशन के लिए बाज़ार से जुड़ी स्कीम
नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश का एक हिस्सा शेयर बाज़ार और बॉन्ड में लगाया जाता है, इसलिए इसमें रिटर्न बाज़ार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। रिटायरमेंट पर एकमुश्त रकम के साथ-साथ नियमित पेंशन भी मिलती है। इसमें अतिरिक्त टैक्स छूट का भी प्रावधान है। जो लोग थोड़ा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए एनपीएस अच्छा विकल्प हो सकता है।
आपके लिए कौन सी स्कीम सही?
अगर आप नौकरी करते हैं, तो ईपीएफ अपने आप चलता रहेगा — इसके साथ पीपीएफ या एनपीएस में अतिरिक्त निवेश कर सकते हैं। पूरी तरह सुरक्षित निवेश चाहिए तो पीपीएफ, और पेंशन के साथ बेहतर रिटर्न की उम्मीद है तो एनपीएस चुनें। बेहतर होगा कि अपनी उम्र, आय और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से इनमें संतुलन बनाकर निवेश करें।









