देहरादून: राजधानी देहरादून की सड़कों पर शुक्रवार को सियासी पारा अचानक चढ़ गया। भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सचिवालय का घेराव किया और जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों पर लोकतंत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग उठाई। इस दौरान गुस्साए कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन कार्यालय के बाहर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका।
दरअसल, यह प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के देशव्यापी आह्वान के तहत आयोजित किया गया था। कांग्रेस मुख्यालय से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जोरदार नारेबाजी के साथ सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय तक पहुंचा। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की अगुवाई में उमड़े हुजूम के चलते प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। पार्टी ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम उपजिलाधिकारी सदर को ज्ञापन सौंपकर मामले में तुरंत दखल देने की गुहार लगाई है।
मतदाता सूची में ‘फॉर्म-7’ के जरिए नाम काटने का खेल!
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का दावा किया। नेताओं का कहना था कि उत्तराखंड के कई विधानसभा क्षेत्रों में एक सोची-समझी रणनीति के तहत असली और वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
असल में, कांग्रेस का आरोप है कि कुछ खास लोग थोक के भाव में ‘फॉर्म-7’ दाखिल कर रहे हैं, ताकि विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम काटे जा सकें। पार्टी का तर्क है कि जो लोग संबंधित मतदाताओं के पड़ोसी या स्थानीय निवासी तक नहीं हैं, वे आखिर इतनी बड़ी तादाद में आपत्तियां कैसे दर्ज करा रहे हैं? कांग्रेस ने मांग रखी कि ऐसे तमाम आवेदनों की विधानसभा और बूथ स्तर पर जांच कर उनकी सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही, जब तक बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन न हो, तब तक किसी भी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से कतई न हटाया जाए।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और मनमानी के आरोप
कांग्रेस नेताओं ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि आयोग के भीतर दो आयुक्तों की असहमति को दरकिनार करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, निर्वाचन आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था की साख पर जिस तरह का संकट खड़ा हुआ है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद आम जनता के वोट पर टिकी है। अगर मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया में ही पक्षपात दिखने लगे, तो फिर संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा कैसे बचेगा? कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत प्रभाव से पद छोड़ना चाहिए और उनके द्वारा लिए गए एकतरफा फैसलों को रद्द कर आयोग में नए सिरे से नियुक्तियां की जानी चाहिए।
मार्च और घेराव के दौरान कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा सहित विधायक ममता राकेश, फुरकान अहमद, लखपत बुटोला और बड़ी तादाद में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सड़कों पर उतरे इस तेवर से साफ है कि आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का मुद्दा उत्तराखंड की सियासत में और गहराने वाला है।
