देहरादून के राजपुर रोड पर गुरुवार को आयोजित एक कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की जनता अब किसी सियासी अस्थिरता के फेर में नहीं पड़ना चाहती, प्रदेश के लोग केवल स्थायित्व और निरंतर विकास चाहते हैं। ‘अड्डा इनसाइडर’ के मंच से ‘उत्तराखंड-विकास, चुनौतियां और 2027 की राह’ विषय पर अपनी बात रखते हुए सीएम ने साफ किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और विकास का लाभ पहुंचाना है।
सार्वजनिक जीवन के मूल्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी के लिए ‘राष्ट्र प्रथम, संगठन द्वितीय और व्यक्ति तृतीय’ का सिद्धांत सर्वोपरि है। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि देवभूमि के मूल स्वरूप से समझौता किए बिना विकास की रफ्तार को दोगुना किया जाए।
पीएम मोदी का विजन और उत्तराखंड विकास मॉडल
सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से दिली जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है। प्रधानमंत्री बनने के बाद वे 28 बार देवभूमि का दौरा कर चुके हैं, जो अपने आप में इस पर्वतीय राज्य के प्रति उनके विशेष लगाव को दर्शाता है।
दरअसल, पहले जिन सीमांत गांवों को देश का ‘अंतिम गांव’ मानकर उपेक्षित छोड़ दिया जाता था, पीएम मोदी ने माणा गांव पहुंचकर उस परिभाषा को ही बदल दिया। उन्होंने सीमावर्ती गांवों को देश का ‘प्रथम गांव’ घोषित कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। धामी के मुताबिक, इसी सोच का असर है कि सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स का हवाला देते हुए सीएम ने गर्व जताया कि उत्तराखंड ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। आज राज्य सिर्फ पारंपरिक धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग और उभरते वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में देश-दुनिया में अपनी अलग साख बना रहा है।
युवाओं पर फोकस: 35 हजार सरकारी नौकरियां और सख्त नकल विरोधी कानून
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री का सबसे ज्यादा जोर प्रदेश की युवा आबादी पर रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना प्रधानमंत्री ने देखा है, उसकी रीढ़ देश का युवा वर्ग ही है।
धामी ने एक निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें युवाओं के बीच एक मुख्यमंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि एक दोस्त बनकर जाना पसंद है। युवाओं से मिलकर उन्हें न सिर्फ नई ऊर्जा मिलती है, बल्कि उनकी आकांक्षाओं और जमीनी समस्याओं को सीधे समझने का मौका भी मिलता है।
सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर उन्होंने बेबाक राय रखी। उन्होंने बताया कि राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून लागू किया गया, ताकि मेधावी छात्रों का मनोबल न टूटे। पिछले लगभग पांच सालों के भीतर प्रदेश में करीब 35 हजार युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। कौशल विकास और स्वरोजगार के जरिए भी युवाओं को नए अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं।
देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा और 13 हजार एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त
विकास कार्यों की चर्चा के साथ ही सीएम ने सरकारी संपत्तियों की हिफाजत और कानून व्यवस्था पर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप को किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।
प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष अभियानों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जे और अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा ताकि सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल सिर्फ राज्य के जनहित और विकास कार्यों के लिए हो सके।
सीएम धामी ने भरोसा जताया कि विकास की ठोस नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उत्तराखंड आने वाले समय में देश के सबसे सशक्त और अग्रणी राज्यों की कतार में मजबूती से खड़ा दिखेगा।
