उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा दांव खेलते हुए अपने 5 समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले होने जा रहे इन चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक माना जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की सहमति के बाद पार्टी ने प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप दिया।
पांच जिलों के नाम घोषित
भाजपा की ओर से जारी सूची में देहरादून, चमोली, उत्तरकाशी, कोटद्वार और टिहरी जिला सहकारी बैंक शामिल हैं। भाजपा प्रदेश कार्यालय ने 6 सितंबर को पत्र जारी कर इन उम्मीदवारों को पार्टी समर्थित प्रत्याशी घोषित किया।
देहरादून जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद के लिए मंजीत रावत को भाजपा का समर्थन मिला है। वहीं, चमोली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद के लिए गजेंद्र सिंह रावत को समर्थित प्रत्याशी बनाया गया है।
अन्य जिलों में उम्मीदवार
उत्तरकाशी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने शारदा राणा को अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया है। दूसरी तरफ कोटद्वार जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद के लिए पंकज रावत को पार्टी का समर्थन दिया गया है।
टिहरी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद के लिए सुभाष चंद्र स्मोला को भाजपा का समर्थित प्रत्याशी घोषित किया गया है।
प्रदेश कार्यालय से जारी पत्र
भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार के हस्ताक्षर से जारी पत्र के माध्यम से घोषित की गई। पत्र में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की सहमति के बाद इन नामों को पार्टी समर्थित प्रत्याशी बनाए जाने की जानकारी दी गई है।
भाजपा की इस घोषणा के बाद इन पांच जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। सहकारी बैंकों में अध्यक्ष की भूमिका बैंक संचालन और नीतिगत निर्णयों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
समर्थन जुटाना अगली चुनौती
अब भाजपा के सामने इन प्रत्याशियों के पक्ष में सहकारी क्षेत्र से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधियों का समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। सहकारिता चुनाव को लेकर लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था और पिछले कुछ समय से सहकारी बैंकों के चुनाव के लिए कई नाम चर्चा में थे।
अब पार्टी ने विभिन्न जिलों के लिए अपने समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। भाजपा का पूर्व में भी सहकारी बैंकों के चुनाव के बाद दबदबा रहा है और पार्टी की कोशिश एक बार फिर अध्यक्ष पदों पर अपने समर्थित प्रत्याशियों को जीत दिलाने की है।
