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उत्तराखंड में मौसम का ‘ऑरेंज अलर्ट’: पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में ओलावृष्टि का संकट, किसानों की बढ़ी धड़कनें

By: Sansar Live Team

On: Thursday, March 19, 2026 1:35 PM

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उत्तराखंड में कुदरत एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने को तैयार है। देवभूमि के आसमान पर काले बादलों ने डेरा डाल लिया है और मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए राज्य के अधिकांश हिस्सों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी कर दिया है। मार्च के महीने में जब लोग गर्मी की आहट महसूस करने लगे थे, तब पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से मौसम ने ऐसी करवट ली है कि पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

दरअसल, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि गुरुवार और शुक्रवार को प्रदेश के सात जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ‘स्क्वाल’ यानी तीव्र आंधी चलने की आशंका है। इसमें देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं।

खेती-किसानी पर मौसम की मार: गेहूं और सरसों की फसल को खतरा

इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे बुरा असर उत्तराखंड के अन्नदाताओं पर पड़ने वाला है। असल में, यह समय रबी की फसलों की कटाई और उनके तैयार होने का होता है। मैदानी इलाकों में गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में लहलहा रही हैं, लेकिन मौसम विभाग की ओलावृष्टि की चेतावनी ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेज हवाओं के साथ ओले गिरते हैं, तो खड़ी फसल जमीन पर बिछ सकती है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आएगी।

स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और सिंचाई का काम फिलहाल रोक दें। मंडियों में भी खुले में रखे अनाज को तिरपाल से ढकने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नुकसान को कम से कम किया जा सके।

ऊंचाई वाले इलाकों में ‘जनवरी जैसी ठंड’, बद्री-केदार में बर्फबारी

मैदानी इलाकों में जहां आंधी-बारिश का डर है, वहीं उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे उच्च हिमालयी जिलों में नजारा बिल्कुल अलग है। 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर भारी बर्फबारी की संभावना जताई गई है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के ऊपरी हिस्सों में ताजा हिमपात शुरू भी हो चुका है, जिससे मार्च के महीने में भी जनवरी जैसी हाड़ कंपाने वाली ठंड का अहसास होने लगा है।

पहाड़ों में हो रही इस बर्फबारी का सीधा असर तापमान पर दिख रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। पर्यटन के लिहाज से मशहूर मसूरी और मुक्तेश्वर जैसे हिल स्टेशनों में पारा 14 डिग्री तक लुढ़कने का अनुमान है, जिससे वहां पहुंचे सैलानियों को अचानक गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस होने लगी है।

भूस्खलन की चेतावनी और यातायात पर असर

मौसम विभाग ने केवल बारिश और बर्फबारी ही नहीं, बल्कि पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) की चेतावनी भी जारी की है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।

प्रमुख शहरों का संभावित तापमान और अलर्ट:

जिलाअधिकतम तापमानमौसम की चेतावनी
देहरादून24°Cभारी बारिश और तीव्र आंधी
हरिद्वार26°Cओलावृष्टि और धूल भरी आंधी
नैनीताल18°Cतेज हवाएं और गरज-चमक
पिथौरागढ़14°Cभारी बारिश और भूस्खलन का खतरा

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में 20 मार्च तक स्थिति नाजुक बनी रहने वाली है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट पर रहने और आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि 21 मार्च के बाद ही मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, तब तक लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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