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नैनीताल में उमड़ा आस्था का सैलाब! मुख्यमंत्री धामी ने नंदा-सुनंदा महोत्सव में टेका मत्था, कही ये बड़ी बात

By: Sansar Live Team

On: Tuesday, September 22, 2026 3:43 PM

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उत्तराखंड की प्रसिद्ध और खूबसूरत झील नगरी नैनीताल इन दिनों माँ नंदा-सुनंदा की भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर हो चुकी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल में आयोजित भव्य माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में बड़े उत्साह के साथ शिरकत की। मुख्यमंत्री ने माँ नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन करते हुए प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने महोत्सव में मौजूद सभी माताओं, बहनों, बुजुर्गों, युवाओं और प्यारे बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत और अभिनंदन भी किया।

आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत उत्सव है नंदा देवी महोत्सव

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नैनीताल का यह प्रसिद्ध नंदा देवी महोत्सव केवल एक साधारण मेला नहीं है, बल्कि यह हमारी गहरी आस्था, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही प्राचीन परंपराओं का एक पवित्र उत्सव है। इस महोत्सव के माध्यम से माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की अनूठी परंपरा, पारंपरिक लोकगीत, प्रसिद्ध झोड़ा-चांचरी और ढोल-दमाऊं की थाप जैसी हमारी लोक संस्कृति की तमाम विधाएं जीवंत हो उठती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जो समाज अपनी जड़ों और संस्कृति पर गर्व करना जानता है, वही समाज पूरे आत्मविश्वास के साथ भविष्य की तरफ आगे बढ़ता है। नैनीताल अपनी खूबसूरत झील, ऊंचे पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म का भी बहुत बड़ा केंद्र है। यहां माँ नैना देवी का पावन धाम, हनुमानगढ़ी और दुनिया भर में विख्यात कैंची धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल मौजूद हैं। इसके अलावा मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है, जो प्रकृति और अध्यात्म के इस अद्भुत संगम को नैनीताल की एक खास पहचान दिलाता है।

“विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश भर में हमारी प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और संवारने का शानदार काम हो रहा है। अयोध्या में भव्य प्रभु श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक के साथ-साथ केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हुए विकास कार्यों ने देश की आस्था के इन बड़े केंद्रों को एक नई पहचान दी है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की सरकार भी “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र पर चलते हुए देवभूमि को विकास के पथ पर आगे ले जा रही है।

उन्होंने जानकारी दी कि जिस तरह केदारखंड का विकास किया गया है, उसी तर्ज पर अब कुमाऊं क्षेत्र में भी ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के जरिए तमाम पौराणिक और धार्मिक स्थलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना और साथ ही हमारी प्राचीन विरासत के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना है। माँ नैना देवी, कैंची धाम और मुक्तेश्वर जैसे प्रमुख स्थलों के विकास से इस पूरे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को एक नई रफ्तार मिलेगी।

धार्मिक पर्यटन से चमकेंगे रोजगार के नए रास्ते

मुख्यमंत्री धामी ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। धार्मिक पर्यटन के बढ़ने से प्रदेश के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, हमारी मातृशक्ति को स्वरोजगार के बेहतरीन मौके मिलेंगे और स्थानीय कला व उत्पादों को एक बड़ा वैश्विक बाजार हासिल होगा। इससे उत्तराखंड की अनूठी संस्कृति और परंपराएं देश-दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच सकेंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि नैनीताल जिले के चहुंमुखी विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार की पूरी कोशिश है कि पहाड़ के लोगों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के लिए अपने घरों से दूर न भटकना पड़े और विकास का यह लाभ समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।

देवभूमि की पहचान और संस्कृति की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध

अपने संबोधन में सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि विकास के साथ-साथ देवभूमि की जमीन, यहां के प्राकृतिक संसाधनों और इसकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य में भूमि से जुड़े कानूनों को बेहद सख्त बनाया गया है। इसके तहत पर्वतीय जिलों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि और उद्यान श्रेणी की जमीन खरीदने पर कड़े प्रतिबंध लगाने के प्रावधान किए गए हैं।

सरकार देवभूमि की संस्कृति और संसाधनों के संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और लैंड जिहाद व लव जिहाद जैसी गतिविधियों के खिलाफ भी लगातार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे ऐतिहासिक कदमों के जरिए महिलाओं के कानूनी अधिकारों को और अधिक मजबूत किया गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित हुआ है।

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