धामी सरकार की होम स्टे नीति से पहाड़ के गांवों को मिली नई रफ्तार
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की होम स्टे नीति ने पहाड़ के गांवों में पर्यटन को एक बिल्कुल नई रफ्तार दी है और यह नीति गांवों से हो रहे रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है। आज स्थिति यह है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं ने होम स्टे के इस शानदार व्यवसाय को अपनाकर खुद के पैरों पर खड़े होने की बेहतरीन मिसाल पेश की है। अगर रिवर्स पलायन की बात की जाए, तो अब तक लगभग साढ़े छह हजार प्रवासी अपने पैतृक गांव वापस लौट चुके हैं, और हैरानी की बात यह है कि इनमें से 22 प्रतिशत से अधिक प्रवासियों ने सीधे तौर पर होम स्टे के इस कारोबार को अपना लिया है।
दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना बनी वरदान, मिल रही है भारी सब्सिडी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए पर्यटन को सीधे गांव-गांव तक पहुंचाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी शानदार उद्देश्य के तहत पूरे प्रदेश में होम स्टे निर्माण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, आज पूरे उत्तराखंड में लगभग पांच हजार से अधिक होम स्टे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इस पूरी दिशा में ‘दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना’ बेहद कारगर साबित हुई है। इस योजना के तहत पिछले चार वर्षों में कुल 537 पात्र लाभार्थियों को लगभग 79 करोड़ 28 लाख 18 हजार रुपये की भारी-भरकम धनराशि अनुदान (सब्सिडी) के रूप में दी जा चुकी है।
इस योजना के नियमों के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्रों में परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 15 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में लागत का 25 प्रतिशत यानी अधिकतम 7.50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस बेहतरीन योजना को लेकर प्रदेश के युवाओं और महिलाओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। धामी सरकार की यह योजना आज ग्रामीण पर्यटन विकास का सबसे मजबूत आधार बन चुकी है। इसका सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण रुद्रप्रयाग जिले का खूबसूरत ‘सारी गांव’ है, जहाँ आज 40 से अधिक होम स्टे चल रहे हैं और देश-विदेश से बड़ी संख्या में ट्रेकर्स और पर्यटक वहाँ पहुँच रहे हैं।
पर्यटकों से अब गुलजार होगा ऐतिहासिक जादुंग गांव
उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित बेहद खूबसूरत ‘जादुंग गांव’ अब बहुत जल्द पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार होने जा रहा है। धामी सरकार ने इस ऐतिहासिक गांव को एक आधुनिक होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है। वर्तमान में यहाँ छह नए होम स्टे का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में चल रहा है। आपको बता दें कि साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सामरिक सुरक्षा कारणों से सेना ने सीमांत क्षेत्र के नेलांग और जादुंग गांवों को खाली करवा लिया था। अब राहत की बात यह है कि ये दोनों ही गांव केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के अंतर्गत शामिल किए जा चुके हैं, जिससे यहाँ विकास की नई बहार आई है।
ट्रेकिंग ट्रेक्शन सेंटर योजना से मजबूत हो रहा है पर्यटन का ढांचा
उत्तराखंड में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ‘मेरी योजना मेरी सरकार’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘ट्रेकिंग ट्रेक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना’ भी बहुत प्रभावी तरीके से चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन सुविधाओं को बेहतर करना और इसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी को पक्का करना है। इस योजना के तहत भी बीते चार वर्षों में 258 पात्र लोगों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जा चुका है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों को ठहरने की बेहतरीन सुविधाएं मिल रही हैं।
जानिए क्या हैं इस होम स्टे योजना से जुड़ी खास बातें और शर्तें
- यह ‘दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना’ पूरे राज्य में लागू की गई है, लेकिन किसी भी नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
- इस शानदार योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का उत्तराखंड राज्य का मूल निवासी होना अनिवार्य रूप से जरूरी है।
- नया होम स्टे बनवाने के बाद या फिर पुराने भवन का नवीनीकरण करवाने के बाद उसे उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद में पंजीकृत (Register) कराना बेहद जरूरी होता है।
- इस योजना के लिए उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाता है। इसके बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक में आवेदक का साक्षात्कार होता है और प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद लोन की मंजूरी के लिए आवेदन बैंक को भेज दिया जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश
इस योजना की सफलता पर बात करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा है, “हमारे गांव खुशहाल होंगे तो हमारा प्रदेश और देश भी निश्चित रूप से खुशहाल होगा।” इसी एक मूल ध्येय वाक्य के साथ सरकार पर्यटन को सीधे गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। इस दिशा में होम स्टे योजनाएं बेहद कारगर साबित हुई हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों द्वारा इस व्यवसाय को अपनाने से जहाँ एक तरफ युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे गांव आज देश-विदेश के सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।
