देहरादून। केदारनाथ धाम में देश-विदेश से उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच उत्तराखंड शासन ने यात्रा व्यवस्थाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद शासन स्तर से सीधे जमीनी हालात पर नजर रखी जा रही है। मंगलवार को आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जनपद रुद्रप्रयाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर यात्रा मार्ग के चप्पे-चप्पे का जायजा लिया। समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी गई कि भोले के भक्तों को किसी भी पड़ाव पर असुविधा नहीं होनी चाहिए और छोटी से छोटी परेशानी का भी फौरन समाधान निकाला जाए।
दरअसल, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते मौसम के बीच केदारनाथ यात्रा का सफल संचालन प्रशासन के लिए हर दिन एक नई चुनौती पेश करता है। बैठक में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी ने ग्राउंड रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में यात्रा पूरी तरह सुचारु है। मुख्य पड़ावों पर बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कोई बड़ा संकट नहीं है, लेकिन ऊंचाई वाले इलाकों में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने की दरकार है।
Kedarnath Yatra Arrangements के तहत स्वास्थ्य ढांचे पर जोर, विशेषज्ञ डॉक्टरों की होगी तैनाती
समीक्षा बैठक में सबसे ज्यादा जोर यात्रियों की सेहत और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर रहा। जिलाधिकारी ने प्रभारी सचिव के संज्ञान में लाया कि यात्रा मार्ग पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट काम कर रहे हैं, मगर कई संवेदनशील बिंदुओं पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी महसूस की जा रही है।
इस पर डॉ. आर. राजेश कुमार ने तत्काल आश्वासन दिया कि शासन स्तर से इस कमी को जल्द दूर कर अतिरिक्त स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जब देश-दुनिया से श्रद्धालु देवभूमि आ रहे हैं, तो इमरजेंसी की स्थिति में हमारा हेल्थ सिस्टम हर वक्त अलर्ट मोड में दिखना चाहिए। दवाइयों के स्टॉक से लेकर ऑक्सीजन और एंबुलेंस की उपलब्धता में रत्ती भर की भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पशु कल्याण पर सख्त रुख, घोड़ा-खच्चरों के साथ क्रूरता पर रोक
केदारनाथ के कठिन पैदल मार्ग पर चलने वाले बेजुबानों की सुध लेते हुए प्रभारी सचिव ने घोड़ा-खच्चरों के संचालन और उनके स्वास्थ्य प्रबंधन की भी पड़ताल की। उन्होंने अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पशु कल्याण के मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। यात्रा के दौरान पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित हो, उनके लिए पर्याप्त चारे, पानी और नियमित वेटनरी जांच की मुकम्मल व्यवस्था रहे। तय क्षमता से अधिक बोझ लादने या बीमार पशुओं को यात्रा में झोंकने की शिकायतों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
आपसी तालमेल से दुरुस्त रहेंगी बुनियादी व्यवस्थाएं
समीक्षा के अंत में प्रभारी सचिव ने पुलिस, प्रशासन, विद्युत, पेयजल और पीडब्ल्यूडी जैसे तमाम विभागों को अलग-थलग काम करने के बजाय एक टीम के रूप में जुटने को कहा। उन्होंने साफ किया कि सफाई, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई ढिलाई नहीं दिखनी चाहिए। यात्रा व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग लगातार होती रहेगी ताकि श्रद्धालुओं को केदारघाटी में केवल भक्ति का सुखद अनुभव मिले, अव्यवस्थाओं की मार नहीं।
