देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं के लिए मायानगरी मुंबई की राह अब आसान होने वाली है। फिल्म और सिनेमा की दुनिया में करियर बनाने का सपना देख रहे पहाड़ के होनहारों को अब पैसों की तंगी के कारण कदम पीछे नहीं खींचने पड़ेंगे। सूबे की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अपनी नई फिल्म नीति के जरिए युवाओं के सपनों को हकीकत में बदलना शुरू कर दिया है। सरकार की इस पहल से फिल्म मेकिंग की बारीकियां सीख रहे छात्रों को न सिर्फ बड़ा आर्थिक संबल मिला है, बल्कि उनके हौसलों को एक नई उड़ान भी मिली है।
दरअसल, उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने देश के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान यानी ‘फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान, पुणे’ (FTII) से अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके राज्य के तीन होनहार युवाओं को स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) की राशि जारी कर दी है। इसके तहत लाखों रुपयों का भुगतान सीधे छात्रों के खातों में किया गया है। उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 के लागू होने के बाद यह एक बड़ा और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर युवाओं को सीधा फायदा पहुंचना शुरू हो गया है।
इन तीन होनहारों को मिला योजना का लाभ
बताया जा रहा है कि जिन तीन युवाओं को इस योजना के तहत पहली बार राशि जारी की गई है, वे उत्तराखंड के अलग-अलग पहाड़ी जिलों से ताल्लुक रखते हैं। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बंशीधर तिवारी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है।
उनके मुताबिक, रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ निवासी प्रवीण सेमवाल को उनके एक साल के पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 65,682 रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं, चमोली जिले के मुंदोली (हरनी) गांव की रहने वाली कविता को दो साल के पीजी डिप्लोमा कोर्स के लिए 1,27,619 रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अलावा, नैनीताल के तल्लीताल निवासी देवेश भट्ट को उनके तीन साल के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स के लिए सबसे ज्यादा 1,38,990 रुपये की स्कॉलरशिप दी गई है। इन तीनों ही छात्रों ने पुणे स्थित FTII से सिनेमा के अलग-अलग विधाओं में अपनी शिक्षा पूरी की है।
जानिए क्या है उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 और इसके नियम
असल में, सरकार ने इस नीति को इसी मकसद से तैयार किया है ताकि उत्तराखंड की वादियों के साथ-साथ यहां की प्रतिभाओं को भी वैश्विक मंच मिल सके। नीति के नियमों के मुताबिक, पुणे के FTII या कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान जैसे देश के किसी भी मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित संस्थान से फिल्म मेकिंग, डायरेक्शन, एक्टिंग या तकनीकी कोर्स करने वाले उत्तराखंड के मूल निवासी छात्र इसके पात्र होंगे।
यह स्कॉलरशिप मेरिट के आधार पर कोर्स पूरा होने और उसका सर्टिफिकेट मिलने के बाद दी जाती है। इसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों का भी विशेष ख्याल रखा गया है। नियमों के तहत एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) वर्ग से आने वाले छात्रों को उनके पूरे कोर्स पर हुए खर्च का 75 फीसदी हिस्सा सरकार देती है। वहीं, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को कुल खर्च का 50 फीसदी तक छात्रवृत्ति के रूप में लौटाया जाता है।
‘युवाओं के सपनों को मिलेगी नई उड़ान’ – सीएम धामी
इस खास मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के युवाओं की तारीफ करते हुए कहा कि उत्तराखंड के युवा रचनात्मक प्रतिभा के धनी हैं और उनमें कमाल का हुनर है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार का यह निरंतर प्रयास है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए बेहतरीन अवसर मिलें। उत्तराखंड फिल्म नीति 2024 इसी सोच के साथ उठाया गया एक बड़ा कदम है। फिल्म जगत में शिक्षा हासिल करने वाले अपने राज्य के युवाओं को स्कॉलरशिप देकर हम उनके सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं।”
निश्चित रूप से सरकार की इस मदद के बाद उत्तराखंड के यह युवा जब बॉलीवुड या क्षेत्रीय सिनेमा जगत में कदम रखेंगे, तो वे बिना किसी आर्थिक मानसिक दबाव के अपनी कला का प्रदर्शन कर सकेंगे। आने वाले दिनों में इस नीति के जरिए कई और छात्रों को भी जोड़ने की तैयारी चल रही है।
