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आंखों में आंसू और जुबां पर ‘खंडूड़ी अमर रहें’, कुछ ऐसी थी पूर्व सीएम की अंतिम विदाई

By: Sansar Live Team

On: Wednesday, May 20, 2026 10:32 AM

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उत्तराखंड की राजनीति के ‘शिखर पुरुष’ और पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी (BC Khanduri) पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई, घाट पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा और वहां मौजूद हर वर्ग के लोगों की आंखें नम हो गईं।

दरअसल, एक फौजी से लेकर प्रदेश के मुखिया तक का सफर तय करने वाले खंडूड़ी जी की छवि हमेशा एक बेहद सादगीपूर्ण और अनुशासित नेता की रही। अंतिम विदाई के वक्त भी यह सम्मान साफ दिखाई दिया जब सेना और पुलिस के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपनी अंतिम सलामी दी। उनके बेटे मनीष खंडूड़ी ने जब पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां खड़ा हर शख्स भावुक हो उठा। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर समेत कई बड़े राजनेता वहां मौजूद थे।

हरिद्वार में बीसी खंडूड़ी (BC Khanduri) की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़

खड़खड़ी घाट पर सुबह से ही लोगों और समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, खंडूड़ी जी का उत्तराखंड के बुनियादी विकास और सुशासन में जो योगदान रहा है, उसे लोग कभी भुला नहीं सकते। यही वजह थी कि उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सिर्फ राजनीतिक दलों के नेता ही नहीं, बल्कि आम जनता भी भारी संख्या में दूर-दूर से पहुंची। सेना के बैंड की शोक धुनों के बीच जब उन्हें पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी जा रही थी, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया।

‘सुशासन और अनुशासन का दूसरा नाम थे खंडूड़ी’

इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भावुक होते हुए कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का निधन सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि चाहे सेना का मैदान हो, केंद्र सरकार में मंत्री का पद हो या फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी, खंडूड़ी जी ने हमेशा पारदर्शिता और कड़े अनुशासन के साथ उत्कृष्ट काम किया। धामी ने उन्हें अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि उनकी कमी हमेशा एक मार्गदर्शक के रूप में महसूस की जाएगी।

वहीं, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी पूर्व सीएम को याद करते हुए उनके जीवन को सादगी और ईमानदारी का एक बड़ा उदाहरण बताया। खट्टर ने कहा कि सुशासन और लोकपाल जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण विषयों को आगे बढ़ाने में खंडूड़ी जी का जो योगदान रहा है, वह हमेशा सभी के लिए प्रेरणादायक रहेगा।

सियासी दिग्गजों और संतों ने दी नम आंखों से श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के इस दिग्गज नेता के अंतिम सफर में राजनीतिक दलों की सीमाएं और मतभेद भी पीछे छूट गए। श्मशान घाट पर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने वालों में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और तीरथ सिंह रावत प्रमुख रूप से शामिल रहे।

बताया जा रहा है कि इनके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, सांसद अनिल बलूनी, अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और खजान दास जैसे कई विधायक और मंत्री भी घाट पर मौजूद थे। कई प्रमुख संतों ने भी वहां पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

देखा जाए तो भुवन चंद्र खंडूड़ी का जाना उत्तराखंड की राजनीति के एक बड़े युग का अंत है। एक ऐसा युग जिसने पहाड़ की राजनीति को कड़े अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उनकी यादें और उनके द्वारा किए गए काम हमेशा प्रदेशवासियों के दिलों में जिंदा रहेंगे।

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