देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सूबे की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब सरकारी दफ्तरों में बाबू और फाइलों का पुराना चक्कर खत्म होने वाला है। राज्य सरकार ने पारदर्शिता और काम में तेजी लाने के लिए पूरे उत्तराखंड के सभी सरकारी विभागों में ‘ई-ऑफिस’ (e-Office) प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 के बाद से कोई भी सरकारी काम कागज वाली फाइलों पर नहीं होगा।
ऑफलाइन फाइलों पर लगा ‘फुल स्टॉप’
सरकार के नए फरमान के बाद अब शासन स्तर पर किसी भी तरह का ऑफलाइन पत्राचार या पेपर-बेस्ड फाइल स्वीकार नहीं की जाएगी। इसका मतलब साफ है कि अब हर चिट्ठी और हर फाइल डिजिटल होगी। हालांकि, राज्य के 961 सरकारी कार्यालयों में से 845 पहले ही ई-ऑफिस से जुड़ चुके हैं, लेकिन कई जगहों पर अभी भी पुरानी ‘फाइल संस्कृति’ हावी थी। इसी ढीले रवैये को देखते हुए मुख्य सचिव ने सख्त चेतावनी दी है कि तय समय के बाद ऑफलाइन फाइलों को सीधे खारिज कर दिया जाएगा।
अफसरों की बढ़ी जिम्मेदारी, डिजिटल होगा सारा काम
इस नई व्यवस्था को 100 फीसदी लागू करने का जिम्मा सीधे विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों (DM) को सौंपा गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी सचिव और प्रमुख सचिव अपने अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस का उपयोग सुनिश्चित करें। जल्द ही इसकी समीक्षा भी की जाएगी और जिन जिलों या विभागों में डिजिटल बदलाव की रफ्तार धीमी पाई गई, उन पर कड़ा एक्शन लिया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्टाफ को जरूरी ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता मुहैया कराएं ताकि काम में कोई रुकावट न आए।
भ्रष्टाचार पर लगाम और जनता को बड़ा फायदा
ई-ऑफिस अनिवार्य होने का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को होगा। अब फाइलों की डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे यह पता चल सकेगा कि कौन सी फाइल किस मेज पर अटकी है। इससे बेवजह की देरी और फाइल रोटेशन जैसी समस्याएं खत्म होंगी। साथ ही, बिना ई-सिग्नेचर वाली कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ेगी, जिससे फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो जाएगी। धामी सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को पूरी तरह ‘डिजिटल उत्तराखंड’ बनाना है, ताकि लोगों को अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
अब वो दौर इतिहास बनने जा रहा है जब लोग फाइल पास कराने के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकते थे। उत्तराखंड प्रशासन की नई भाषा अब डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह होगी।
