देहरादून। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि देवभूमि की सड़कें, सरकारी इमारतें और आपके घर की लाइटें अचानक एक साथ बंद हो जाएं? जी हां, इस शनिवार यानी 28 मार्च की रात उत्तराखंड कुछ ऐसा ही नजर आने वाला है। प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। इस शनिवार रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक पूरे प्रदेश में ‘ब्लैकआउट’ जैसी स्थिति रहेगी, लेकिन यह किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि धरती को बचाने की एक वैश्विक मुहिम का हिस्सा होगा।
दरअसल, इस साल ‘अर्थ ऑवर’ (Earth Hour) अपने सफर के दो दशक पूरे कर रहा है। 20 साल के इस ऐतिहासिक मौके पर भारत सरकार ने इसे बेहद खास बनाने की तैयारी की है। इसी कड़ी में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर प्रदेशवासियों से इस मुहिम में शामिल होने की अपील की है। आदेश के मुताबिक, शनिवार रात ठीक 8:30 बजे राजभवन समेत राज्य के तमाम सरकारी दफ्तरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की गैर-जरूरी लाइटें बंद कर दी जाएंगी।
राजभवन से लेकर आम घरों तक दिखेगा असर
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने न केवल आदेश जारी किया है, बल्कि खुद मिसाल पेश करने की बात कही है। राजभवन की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि लोकभवन के सभी अधिकारी और कर्मचारी इस एक घंटे के दौरान अपने कार्यालयों और घरों की फिजूल लाइटें बंद रखें। बताया जा रहा है कि सरकार का मकसद सिर्फ बिजली बचाना नहीं है, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ एकजुटता का एक कड़ा संदेश देना है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी जनता और व्यापारियों से आग्रह किया है कि वे स्वेच्छा से इस अभियान का हिस्सा बनें और एक घंटे के लिए ऊर्जा संरक्षण का संकल्प लें।
20 साल का सफर और WWF की मुहिम
इस बार का ‘अर्थ ऑवर’ इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF India) ने इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। 2007 में सिडनी से शुरू हुई यह छोटी सी कोशिश आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुकी है। जानकारों का मानना है कि महज 60 मिनट के लिए बिजली उपकरणों को बंद करने से कार्बन उत्सर्जन में जो कमी आती है, वह पर्यावरण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड शासन को मिले पत्र के अनुसार, इस दौरान देश के बड़े स्मारकों से लेकर हेरिटेज साइट्स तक अपनी लाइटें बंद रखेंगी, ताकि दुनिया को बताया जा सके कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य चाहते हैं।
क्यों जरूरी है यह एक घंटा?
अक्सर लोग सवाल करते हैं कि सिर्फ एक घंटे लाइट बंद करने से क्या होगा? असल में, यह सांकेतिक अभियान जन-जागरूकता का सबसे बड़ा माध्यम है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए, जो पहले से ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है, ऐसी पहल काफी मायने रखती है। बिजली की बर्बादी रोकना और प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल ही इस मुहिम का असली आधार है। अधिकारियों का कहना है कि अगर प्रदेश का हर नागरिक एक बल्ब भी बंद करता है, तो सामूहिक रूप से हम ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा बचा पाएंगे, जो सीधे तौर पर धरती के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होगी।
इस शनिवार की रात 8:30 बजे जब उत्तराखंड की लाइटें बंद होंगी, तो वह अंधेरा डराने वाला नहीं, बल्कि उम्मीद जगाने वाला होगा। यह याद दिलाएगा कि विकास की दौड़ में हम अपनी प्रकृति को पीछे नहीं छोड़ सकते। उम्मीद की जा रही है कि देहरादून से लेकर बद्रीनाथ-केदारनाथ तक, हर कोई इस मुहिम में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
