अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यमन के हूती विद्रोहियों को कड़ी चेतावनी दी है। ‘Trump Houthis Warning’ के तहत ट्रंप ने 13 अक्टूबर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि हूती ‘बहुत बुरा बर्ताव’ (behaving very badly) कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल यमन में अमेरिकी हमलों के बाद शांत पड़े हूतियों ने ‘शायद ईरान के इशारे पर’ हमले दोबारा शुरू कर दिए हैं।
ट्रंप ने हूतियों पर 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले तेल की कीमतें जानबूझकर बढ़ाने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, ‘मैं चुनाव के बाद वहां रहूंगा, और मैं कभी नहीं भूलूंगा!’ इसे व्यापक रूप से इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि कोई भी अमेरिकी सैन्य जवाब चुनाव के बाद ही आएगा।
क्यों बढ़ा तनाव? ताज़ा हमलों का सिलसिला
दरअसल, पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में तनाव तेज़ी से बढ़ा है। 13 अक्टूबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के नए मिसाइल और ड्रोन हमले को नाकाम किया — रियाद, दक्षिणी और पूर्वी प्रांत के ऊपर क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ड्रोन को रोका गया। रियाद में मलबा गिरने से 4 लोग घायल हुए और 15 घर क्षतिग्रस्त हुए। पूर्वी प्रांत में आरामको की एक सुविधा में सीमित आग भी लगी, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।
14 अक्टूबर की सुबह रियाद की ओर दागी गई एक और बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया गया। हूतियों ने सऊदी हवाई अड्डों और तेल ढांचे पर और हमलों की धमकी दी है। जवाब में गठबंधन ने यमन के सना, धमार और सादा में तेल ठिकानों पर हमले किए जाने की पुष्टि की है। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को रियाद के हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद से ही क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
तेल की कीमतों में उछाल, ट्रंप का चुनावी एंगल
हमलों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है। 12 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 106.65 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 15 सितंबर के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। ट्रंप का आरोप है कि हूती चुनाव से पहले कीमतें बढ़ाकर राजनीतिक दबाव बनाना चाहते हैं।
ऊर्जा बाज़ार के जानकारों का कहना है कि लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में हर हमले की खबर कीमतों को ऊपर धकेलती है। मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले महंगा ईंधन अमेरिकी मतदाताओं के मूड को प्रभावित कर सकता है — और ट्रंप इसे बखूबी समझते हैं।
Trump Houthis Warning के बाद आगे क्या होगा?
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह सऊदी हितों के समर्थन में हस्तक्षेप के लिए तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन से बात कर सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने सऊदी अरब को खुफिया जानकारी और टारगेटिंग में मदद दी है, लेकिन आक्रामक अभियानों में अपनी सेना भेजने का वादा नहीं किया है।
वहीं, हूती अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इस संघर्ष में शामिल हुआ तो उसे ‘तेज़ और दर्दनाक’ जवाब मिलेगा। जानकारों का मानना है कि मध्यावधि चुनावों तक अमेरिका सीधी सैन्य कार्रवाई से बचेगा, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति बदल सकती है — जैसा कि खुद ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है।
फिलहाल सऊदी अरब हाई अलर्ट पर है और गठबंधन यमन में हूती ठिकानों पर दबाव बनाए हुए है। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि यह टकराव बातचीत की ओर बढ़ता है या क्षेत्र एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।















