अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना की अंतिम टुकड़ी अब इराक की जमीन से पूरी तरह बाहर आ रही है। इस घोषणा के साथ ही पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से चला आ रहा अमेरिकी सैन्य दखल हमेशा के लिए खत्म हो गया है और अमेरिका अपना सारा सामान समेटकर घर वापसी कर रहा है।
बुधवार को व्हाइट हाउस में ‘नेशनल हिस्पैनिक हेरिटेज मंथ’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने मंच से कहा, “आज मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अमेरिकी सेना की आखिरी टुकड़ी इराक की जमीन से पूरी तरह निकल रही है।” उन्होंने कहा कि अतीत में बहुत से गलत फैसले हुए थे, जिनकी वजह से अमेरिका इस लंबी और कठिन स्थिति में फंसा था। ट्रंप ने सेना की वापसी को अमेरिका और इराक दोनों के लिए एक अहम मोड़ करार दिया।
कठिन दौर का पटाक्षेप
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि यह एक अत्यंत कठिन दौर था जो वर्षों तक लगातार चलता रहा, लेकिन अब बहुत जल्द इतिहास का वह डरावना अध्याय सदा के लिए समाप्त हो जाएगा। उनके अनुसार अमेरिका के लिए यह एक शानदार दिन है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका इराक में एक नई और स्थिर सरकार छोड़कर जा रहा है।
ट्रंप ने इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी की जमकर प्रशंसा की और कहा कि देश में हुए चुनावों के समय उन्होंने उनका पूरा साथ दिया था। उन्होंने अमेरिकी सैन्य भागीदारी की शुरुआत को राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में 2003 में हुए हमले से जोड़ा। इसके अलावा उन्होंने 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में प्रारंभ ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व’ का विशेष जिक्र किया और कहा कि यह अभियान उनके नेतृत्व में 2026 में पूरी तरह खत्म हो रहा है।
ISIS पर जीत से जुड़ी वापसी
ट्रंप ने इस वापसी को अमेरिका और इराक दोनों की बड़ी जीत बताया और इसे इस्लामिक स्टेट के क्षेत्रीय ‘खिलाफत’ के पूर्ण खात्मे से जोड़ा। उनके शब्दों में यह दिन अमेरिका के लिए जीत का दिन है, इराक के लिए जीत का दिन है और ISIS पर निर्णायक विजय का प्रतीक है, जिसे समूल नष्ट कर दिया गया है — और असल में यही वह प्रमुख वजह थी, जिसके चलते हम वहां गए थे।
ट्रंप ने साफ किया कि एरबिल एयर बेस से हो रही इस वापसी में अमेरिकी जवान और उनके इस्तेमाल के तमाम सैन्य साजो-सामान दोनों शामिल हैं। उन्होंने इस वापसी की तुलना 2021 में अफगानिस्तान से हुई अमेरिकी सेना की बेतरतीब वापसी से बार-बार की। उनके मुताबिक एरबिल एयर बेस से गठबंधन सेना और उपकरणों की यह सुव्यवस्थित वापसी, अत्यंत विषम हालात में चलाए गए एक बेहद खर्चीले अभियान के समापन का स्पष्ट प्रतीक है। उन्होंने गर्व से कहा कि हमने अपना एक-एक सामान वापस ले लिया है।
कमांडरों को सख्त हिदायत
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अपने सभी सैन्य कमांडरों को सख्त निर्देश दिए थे कि यह पक्का किया जाए कि कोई भी छोटी से छोटी चीज वहां पीछे न छूटे। उन्होंने चुटकीले और कड़े लहजे में कहा, “मैंने अपने कमांडरों से कहा था कि मुझे हर एक पेंच चाहिए। अगर जमीन पर कोई छोटा सा पेंच भी पड़ा मिले तो उसे भी उठा लो। अगर हमारे पास कैनवस का कोई पुराना टेंट भी है तो उसे भी साथ ले लो। हमने वहां से हर छोटी-बड़ी चीज उठा ली है।”
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हमेशा एक साफ-सुथरा मिशन निर्धारित किया, अपने कमांडरों को उसे पूर्ण करने के लिए आवश्यक सभी संसाधन दिए और वहां अपनी अस्थायी उपस्थिति को कभी स्थायी नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि अमेरिका इराक में हमेशा के लिए टिका रहे, लेकिन उन्होंने इससे साफ मना कर दिया। बहुत से लोग चाहते थे कि हम वहां सदा रहें, लेकिन मेरे पास ठहरने या प्रस्थान का विकल्प था और मुझे पूरा यकीन हो गया था कि अब अमेरिका के स्वदेश लौटने का एकदम सही वक्त आ गया है।
युद्ध की भारी मानवीय कीमत
ट्रंप ने स्मरण कराया कि अमेरिका विगत 23 वर्षों से इस खूनी संघर्ष में लिप्त रहा है और इस दौरान सैन्य मौजूदगी के चलते देश को भारी मानवीय क्षति सहनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि इन 23 वर्षों के युद्ध में हमने 4,500 से अधिक अपने बेहतरीन अमेरिकी सैनिक गंवाए हैं, जबकि 31,000 से अधिक सैनिक गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं — जिनमें से कुछ की दशा अत्यधिक गंभीर हुई है। इसके अलावा सैकड़ों आम नागरिक और कॉन्ट्रैक्टर भी इस लड़ाई में मारे गए।
ज्ञात हो कि अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर सैन्य आक्रमण मार्च 2003 में शुरू हुआ था, जिसके बाद सद्दाम हुसैन की हुकूमत उखाड़ फेंकी गई थी। यद्यपि अधिकतर अमेरिकी सैनिक 2011 में ही वापस बुला लिए गए थे, किंतु 2014 में जब इस चरमपंथी आतंकी संगठन ने इराक और सीरिया के विशाल क्षेत्रों पर कब्जा जमा लिया, तब एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के हिस्से के रूप में अमेरिकी फौजें वहां पुनः लौट आई थीं।









